मदर ऑफ ऑल बम बनाम न्यूक्लियर बम: जब किसी बम का नाम ‘मदर ऑफ ऑल बम’ यानी सभी बमों की मां हो, तो उसकी ताकत के बारे में लाज़मी है। अमेरिका के पास ऐसा ही एक बम है, जिसे MOAB कहा जाता है। हाल ही में एक रिपोर्ट आई है, जिसमें बताया गया है कि ईरान परमाणु बम का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ कर सकता है। इसका वजन करीब 10 टन है और ब्लास्ट एसिमेलेजर होता है जो बड़े इलाके में भयंकर तबाही मचा सकता है। लेकिन यह परमाणु बम क्या है या कितना खतरनाक है? ईरान की जमीन के नीचे बने शेयर को कैसे स्थिर किया जा सकता है? आइए जानें MOAB और परमाणु बम में क्या अंतर है?
MOAB बम आख़िर है क्या?
इस बम को विमान से प्लांट किया जाता है। ज़मीन से टकराने के बाद भी विस्फोट करना इसका मुख्य तरीका नहीं है। इस जमीन से कुछ ऊपर हवा में विस्फोट हो सकता है। अनोखा कारण एक तेज़ लहर तूफान है जो आसपास के क्षेत्र में फैलता है। इसके वास्तुशिल्प, प्लास्टर और खुले समुद्र तट में भारी क्षति हो सकती है। अमेरिका ने अप्रैल 2017 में अफगानिस्तान के नांगरहार में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के खिलाफ इस बम का इस्तेमाल किया था। युद्ध में इसका प्रयोग सबसे पहले और अब तक का इकलौता मामला बताया गया है।
परमाणु बम की कितनी मात्रा होती है?
MOAB का विस्फोट बहुत बड़ा होता है, लेकिन परमाणु बम की ताकत इससे कई गुना ज्यादा हो सकती है। इसे एक आसान उदाहरण से समझें। जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की ताकत करीब 15 किलोटन टीएनटी के बराबर थी। इसका मतलब यह है कि उसकी प्राकृतिक ऊर्जा लगभग 15,000 टन टीएनटी के विस्फोट के बराबर थी। दूसरी ओर, MOAB की विस्फोटक ताकतें करीब 11 टन टीएनटी के बराबर बताई गई हैं। इस खाते से हिरोशिमा के परमाणु बम सेफ़्टी ऊर्जा MOAB की तुलना में करीब 1,360 गुना था।
अब तक का डेटोनेट बना सबसे बड़ा पोर्टेबल बम। रूस के दागे गए बम की प्रतिकृति। (रॉयटर्स)
नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम की ताकत करीब 21 किलो टन थी। वहीं, इतिहास में अब तक परीक्षण किए गए सबसे शक्तिशाली परमाणु बमों में रूस के ‘जार बॉम्बा’ की क्षमता करीब 50 मेगाटन शामिल थी। इन आंकड़ों से साफ है कि MOAB को कितना भी बड़ा बम क्यों न कहा जाए, इसकी तुलना परमाणु बम से सीधे तौर पर नहीं की जा सकती।
परमाणु बम सबसे ज्यादा खतरनाक क्यों होता है?
परमाणु बम और MOAB के बीच फर्क सिर्फ अनोखे की ताकत का नहीं है। दोनों के काम करने का तरीका भी अलग-अलग है. MOAB में पारंपरिक विक्रय का प्रयोग होता है। इसके अनुसार तेज धमाका होता है और हवा में दबाव की भयानक लहर फैलती है। इसके आस-पास की संरचना और अन्य वस्तुएं संभावित हो सकती हैं। परमाणु बम में परमाणु ऊर्जा उत्सर्जित होती है। यह अनोखा से तेज़ गर्मी और शक्तिशाली दबाव पैदा होता है। इसके अलावा खतरनाक रेड लेबल भी है।
परमाणु बम कुछ इसी तरह काम करता है. (एआई जेनेर निर्देशित)
परमाणु विस्फोट के बाद रेड वातावरण में विस्फोट हो सकता है, जिसमें रेडियो विस्फोट का भी उल्लेख है। इसका असर सिर्फ खास के वक्ता तक सीमित नहीं रहता। हालात के अनुसार रेडिएशन से इंसानों की सेहत और पर्यावरण को लंबे समय तक नुकसान हो सकता है। MOAB में परमाणु बम के समान परमाणु विस्फोट नहीं होता है। इसलिए परमाणु बम की तरह रेडियो स्ट्राइक फ़ॉल आउट का जन्म नहीं होता है।
MOAB जमीन के नीचे क्या लोन पॉलिसी बनाई जा सकती है?
अगर ईरान के परमाणु कण की बात करें तो यह सवाल और अहम हो जाता है। जमीन के काफी नीचे बने शेयर को स्थिर करना आसान नहीं होता। ऊपर से किया गया बड़ा धमाका भी जरूरी नहीं कि गहराई में मौजूद जगह तक पहुंच सके। MOAB को मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर इलाके में विस्फोट करने के लिए बनाया गया है। इस जमीन के नीचे बहुत गहराई में मौजूद मजबूत निशानों को भेदने के लिए विशेष तौर पर बम तैयार नहीं किया गया है। अमेरिका के पास GBU-57 का नाम एक और बम है, जिसे मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर यानी MOP कहा जाता है। इसका वजन करीब 13,600 किलोमीटर है। इसे जमीन के नीचे मजबूत और सुरक्षित पहुंच तक बनाया गया है।








