नोज़ बोरा बांग्लादेश की तरह इस वजह से भारत में चाहते हैं तख्तापलट, ख़ून-खराबे से लाल है उकी पार्टी की कहानी

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नोज़ बोरा यूं नहीं उगल राउंड आग, युसिक पार्टी का मूलमंत्र ही तख्तापलट है

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नेहा बोरा न्यूज़: छात्र नेता नेहा बोरा राष्ट्रवादी हैं। जुलाई में जेन-जेड आंदोलन के समय से ही वह सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं। अब एस एस तिराहा के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन जब से राहुल गांधी ने किया तो गर्ल्ज ने बनाया है तब से यूक्रेनी लोकतंत्र का मतलब क्या है। लेकिन इसी बीच सामने आए एक वीडियो ने नेहा बोरा को सोशल मीडिया पर लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए हैं. नोज़ बोरा पड़ोसी बांग्लादेश की तरह भारत में आंदोलन करना चाहते हैं। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी मासूम लेकिन संघर्ष करने वाली छवि वाली युवा नेता की वाली लड़की तख्तापलट जैसी खतरनाक विचारधारा को लेकर क्यों आगे बढ़ रही हैं। इसके विश्लेषण से पता चलता है कि नियोली ने कहा था कि आइसा के अध्यक्ष हैं, लेकिन उनमें से एक संगठन की मदर पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन पार्टी यानी की मदरसा पार्टी का इतिहास खून से लथपथ है।

नोज़ बोरा यूं नहीं उगल राउंड आग, युसिक पार्टी का मूलमंत्र ही तख्तापलट हैज़ूम

आइसा के अध्यक्ष नोए बोरा ने कहा है कि वह बांग्लादेश के आंदोलन से प्रेरित होकर भारत में ऐसा कर रहे हैं।

एस ट्रूथ में गड़बड़ी का आरोप मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की हो रही मांग के नारे अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) के अध्यक्ष नियो बोरा की पोस्ट गर्ल बनी हैं। नोज़ बोरा कभी राहुल गांधी की प्रगति में होने वाले इंडिया पार्टी के धरने में नजर आते हैं तो कभी कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों में नजर आते हैं। 2 अक्टूबर को नोज़ बोरा इन दोनों से अपने पिता के साथ भी जंतर मंत्र पर हल्ला-हंगामा कर चुकी हैं। खास बात यह है कि धरना प्रदर्शन से लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) राहुल गांधी उन्हें गर्ल पोस्ट के रूप में प्रजेंट करते हुए दिख रहे हैं। 12 अक्टूबर मार्च के दौरान जब न्योता बोरा पार्टी के नेताओं के साथ ट्रक में सवार हुए तब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनके लिए आइसा का झंडा अरेंज किया।

बांग्लादेश की तरह भारत में आग लगने की परंपरा क्या हैं नोज़ीज़ बोरा?

नामांकन के दावेदार नेताओं की तरफ से इतनी बड़ी तवज्जो मीटिंग के बाद सोशल मीडिया से लेकर में नामांकन मीडिया में नामांकन के छात्र नेता नियोआ बोरा छा गए। इसी बीच 15 अक्टूबर को नियोज बोरा का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह गर्व के साथ बता रहे हैं कि उन्हें हाल ही में बांग्लादेश में हुए हिंसक आंदोलन और तख्तापलट की घटना से भारत में भी इस तरह से धरना-प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली थी। नियो बता रही हैं कि बांग्लादेश में भी लोकतंत्र को बहाल करने के लिए आंदोलन कर रही हैं और अब वह भारत में भी ऐसा ही प्रयास कर रही हैं।

ये बातें बिल्कुल सही हैं कि बांग्लादेश में किस वजह से आंदोलन को लेकर ये अलग चर्चा का विषय है. क्योंकि उस देश में कट्टरपंथी पंथ की विरोधी शेख़ हसीना की वकालत में लोकतांत्रिक तरीकों से बनी सरकार चल रही थी। तख्तापलट के बाद पूरे बांग्लादेश में किस तरह से विद्रोह किया गया। जो देश टेक्सटाइल सहित अन्य उद्योग के दम पर विकास की नई इबारत लिख रहा था और वहां हिंसक आंदोलन के बाद क्या हुआ, इन सारी बातों पर चर्चा एक अलग विषय है। लेकिन जब से नोज़ बोरा का वीडियो सामने आया है तब से सोशल मीडिया पर लोग उनसे सवाल कर रहे हैं कि इतनी भोली सूरत और पढ़ी-लिखी लड़की तख्तापलट जैसी बातें कहां से सोच रही हैं। अगर आप भी नेहा बोरा को लेकर कुछ ऐसा ही सोच रहे हैं तो जरा आइसा की मदरसा पार्टी (सीपीआई (एमएल) एल) के इतिहास के पन्ने पलटकर देख लें। सारी कहानी समझ जाएंगे कि आज नोज़ बोरा इतनी कम उम्र में आग क्यों उगल रही हैं।

क्या है नोज़ बोरा की पार्टी का मूलमंत्र?

न केवल आइसा के छात्र नेता हैं, बल्कि उनके संगठन की मां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी इसे आम बोल चाल की भाषा में सी पिज्जा माले ((सीपीआई (एमएल) एल)) कहा जाता है। इस पार्टी की उत्पत्ति ही यही बात लेकर आई है कि हथियार का जोर सत्ता पाया जाए। इसके लिए कितने ही लोगों का खून बहाया जा सके।

साल 1967 में जब पश्चिम बंगाल के बबीली में किसानों के हित में चारू मजूमदार और कानू सान्याल और जंगल संथाल ने सामूहिकवाद की लड़ाई शुरू की थी। जब देश में अप्रैल में बौद्धवाद का विस्तार हुआ तो 22 को 1969 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी (CPI(ML)L) नाम से वामपंथ का नया दल बनाया गया। झारखंड (तब झारखंड भी साथ था), आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश (तब छत्तीसगढ़ के साथ था), महाराष्ट्र जैसे राज्यों में खिलौने माले के लोग हत्याएं करने लगे। उद्यमों के साथ-साथ लागत, हत्याएं जैसे उद्यमों को अंजाम देना। इस हथियार के बल पर डॉक्टर तख्तापलट को छोड़ दिया गया। कामरेड विनोद मिश्रा की रिवोक माले का तेजी से पतन हुआ, लेकिन यह अंडर ग्राउंड पार्टी थी। काफी समय के बाद जापान में अन्य वामदलों की तरह की लोकतांत्रिक व्यवस्था में आई और चुनावी भाग भी लिया गया। यानी नियोए बोरा की पार्टी क्रिसमस माले का आधार ही हिंसक आंदोलन है।

इसलिए इसमें कोई हरत की बात नहीं होनी चाहिए कि नियोए बोरा बांग्लादेश की तरह भारत में भी आंदोलन खड़ा करने की बात कह रही हैं। इस समय के दस्तावेज माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य हैं, जो मूल रूप से बिहार के ही हैं। 2000 के दशक के बाद से इस देश में ईसा मसीह की मृत्यु हो गई है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में ना जाने कितने नाम पर नरसंहार के मामले दर्ज हैं।

अमित शाह के आदेश बनने के बाद टाइमलाइन सेट कर दोस्तीवाद को जड़ से ख़त्म कर दिया गया। स्टॉक में स्टॉक की मजबूती बिहार और झारखंड के कुछ शेयरों में मजबूत मुद्रा है। बिहार में बने सामान और केंद्र स्तर पर बने इंडिया एलायंस में पुस्तकालय माले घटक दल के रूप में जुड़ा हुआ है। रिकी माले की वेबसाइट पर भी फ्रंट पेज पर नियोजी बोरा के सामने संघर्ष करने की तस्वीरें डाली गई हैं।

लेखक के बारे में

ऑथरीमजी

अभिषेक कुमार

अभिषेक कुमार न्यूज18 की डिजिटल टीम में एसोसिएट एसोसिएट एसोसिएट (सहयोगी एडिटर) पद पर हैं। वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, समसामयिक समेत…

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